किसान की इस लड़की ने अपने मुक्कों से किया देश का नाम रोशन

0
141
mc marykom

लड़कियां आज लड़कों से किसी भी मामले में कम नहीं है | और अगर वे ठान ले तो उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं है | और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है एम सी मेरीकॉम | मेरीकॉम ने बॉक्सिंग को अपने कैरियर के रूप में चुना जिसे की पुरुषों के वर्चस्व वाला खेल माना जाता है | लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से इस खेल में सफलता दर सफलता हासिल की और देश को गौरान्वित होने के कई मोके दिए | 

3 बच्चो की माँ मैरीकॉम अब तक 6 बार वर्ल्ड अमेच्योर बॉक्सिंग चैम्पियन रह चुकी है | मैरीकॉम मैंगते चंग्नेइजैंग मैरी कॉम है | मैरीकॉम का जन्म मणिपुर  के चुराचांदपुर के एक बहुत ही गरीब किसान परिवार में हुआ था | इनके पिता मैंगते टोंपा कॉम और माँ मैंगते अगम कॉम किसान थे और खेती से अपना जीवन यापन करते थे | इनके इनके परिवार में एक छोटा भाई भाई और बहन है | मेरी कॉम ने अपनी पढाई लोकतक क्रिस्चन हाई स्कूल और सेंट हेवियर स्कूल से की | ये पढाई के साथ ही अपने माता पिता के साथ खेती में भी उनका हाथ बंटाती थी | अपनी आगे की पढाई के लिए मैरीकॉम इम्फाल गयी जहां पर आदिमजाति स्कूल से एग्जाम दिया लेकिन वे फेल हो गयी | इसलिए उन्होंने अपनी बाकी की पढाई राष्ट्रीय मुक्त विश्व विद्यालय से पूरी की | 

मैरी कॉम को स्कूल के समय से ही खेलों में रूचि थी वे  स्कूल के दौरान , वॉलीबॉल , फुटबॉल, एथलेटिक्स में पार्टिसिपेट करती थी | सन 1998  में जब मणिपुर के डिंको सिंह ने बैंकॉक में हुए ऐशियन गेम्स में गोल्ड दिलाया तो मैरीकॉम ने ये तय कर लिया की वे भी बड़ी होकर बॉक्सर ही बनेंगी | और इसके लिए उन्होंने इम्फाल की स्पोर्ट्स एकेडमी में एडमिसन लिया | और यहाँ उन्हें ट्रेनिंग मिली के कोसाना मितेई से | इस समय उनकी उम्र मात्र 15 साल थी | लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से बॉक्सिंग के बेसिक स्टेप बड़ी तेजी से सिख लिए | जब वे इम्फाल में रहकर बॉक्सिंग प्रेक्टिस कर रही थी तब उनके माता पिता को इसकी खबर नहीं थी | क्युकी अगर उन्हें पता होता तो वो मैरी  को बॉक्सिंग नहीं खेलने देते | क्युकी उन्हें बॉक्सिंग में चोट लगने का डर था और साथ ही यह चिंता थी की बॉक्सिंग में लगे चोट के निशान से उनकी शादी में भी दिक्कत आ सकती है | 

लेकिन जब 2000 में जब मैरीकॉम ने स्टेट बॉक्सिंग चैम्पयनशिप जीती तो इसकी खबर न्यूज़ पेपर और टीवी से उनके माता पिता को चली तो वे अपनी बेटी की इस उपलब्धि पर बड़े खुश हुए और उन्होंने मैरीकॉम को बॉक्सिंग के लिए सपोर्ट किया | इसके बाद तो उत्साहित मैरी ने और भी लगन और मेहनत करने लगी और अगले ही साल 2001 में AIBA वुमन वर्ल्ड चैम्पियनशिप में सिल्वर मैडल जीतकर उन्होंने अपने परिवार के साथ ही देश का नाम भी रोशन किया | लेकिन ये तो शुरुआत थी अगले ही साल उन्होंने इसी चैम्पयनशिप का गोल्ड मॉडल भी जीता | 

साल 2005 में इन्होने ओनलर कॉम से शादी की | लेकिन जंहा और लड़कियां शादी के बाद अपने सपनों को भूलकर घर के ही कामों में लग जाती है | इन्होने अपनी बॉक्सिंग की प्रैक्टिस और अधिक कर दी जिसमे इनके पति ने भी इनका भरपूर साथ दिया | और 2005 2006, 2008 और 2010 में भी वर्ल्ड चैम्पयनशिप में गोल्ड जीता | और पिछले साल 2018 में भी 3 बच्चो की माँ बन चुकी मेरीकॉम ने एक बार फिर दिल्ली में आयोजित वुमन वर्ल्ड चैम्पयनशिप में गोल्ड मेडल अपने नाम किया | इस तरह वर्ल्ड चैम्पयनशिप 6 बार जितने वाली वो दुनिया की पहली महिला बॉक्सर बन गयी है | इनके अलावा वे एशियाई गेम्स में 1 गोल्ड और 2 ब्रॉन्ज के अलावा लन्दन ओलम्पिक में उन्होंने ब्रॉन्ज मैडल जीतकर देश का सर हमेशा गर्व से ऊँचा किया | 

उनकी उपलब्धि को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें 2003 में अर्जुन पुरस्कार और 2006 में भारत के चौथे सबसे बड़े पद्म श्री और 2009 में खेलों के सबसे बड़े पुरस्कार राजीव गाँधी खेल रत्न  से  सम्मानित किया | 

मैरीकॉम पर 2014 में फिल्म भी प्रदर्शित की गयी थी जिसमे मैरीकॉम का किरदार बॉलीवुड और हॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा ने किया था | 

आज वे युवाओ के लिए प्रेरणा स्त्रोत है और उनके जीवन की सफलताएं करोडो लोगों को प्रोत्साहित किया है | 

इसी के साथ उम्मीद करता हु की आज का यह वीडियो आपको बहुत ही पसंद आया होगा | अलगे वीडियो में हम आपको एक और प्रशिद्ध और प्रेरणादायी सख्सियत के बारे में बताएंगे | तो अगर आपको हमारा यह वीडियो पसंद आया तो तो इसे लाइक और शेयर करें | और कोई सवाल या सुझाव हो तो कमेंट करें | और अंत में हमारे चैनल को सब्स्क्राइब करना ना भूलें, धन्यवाद | 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here